जानिये क्यों चढ़ाया जाता है शनिदेव की प्रतिमा को तेल

हिन्दू धर्म में शनिदेव की उपासना बहुत समय से चली आ रही है।  इसके प्रमाण के तौर में भारत में बहुत ज्यादा शनिदेव के मंदिर पाए जाते हैं। अक्सर शनिवार के दिन शनिदेव के मंदिरों के बाहर लम्बी -लम्बी कतारों में भगत शनिदेव के दर्शनों के लिए लगे  रहते हैं। लोग शनिवार के दिन शनिदेव की बहुत श्रद्धापूर्वक आराधना करते है। सूर्यपुत्र शनि को कर्मो का फलदाता भी खा जाता है। ऐसी मान्यता है की शनिदेव हमारे कर्मो का फल देते हैं और उनके पास हमारे हर पूर्व कर्मो का हिसाब किताब होता है। शनिदेव की कृपा सदैव अपने ऊपर बनाये रखने के लिए लोग शनिदेव की प्रतिमा पर खूब तेल चढ़ाते हैं और साथ ही शनिदेव की मूर्ती  के आगे सरसों के तेल का दीपक भी जलाते हैं।

क्या आप जानते हैं कि शनिदेव के आगे तेल क्यों चढ़ाते हैं ?

शनिदेव पर सरसों का तेल बहुत अधिक मात्रा में लोगों  द्वारा तेल चढ़ाये जाने की बहुत  मान्यता है। शनिदेव को तेल चढ़ाने की प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है। इस प्रथा के पीछे कई कहानिया भी है।  जैसे की इसके पीछे एक बहुत ही पुराणी कहानी है जो की रावण पर आधारित है। रावण को अपनी शक्तियों पर बहुत मान था।  समय की बात है जब रावण ने अपने अहंकार में आकर सारे ग्रहों को अपने बंदी बना कर अपने कारागृह में लटका दिया था। उन शनिदेव को भी बंदी बना दिया था किन्तु शनिदेव को उल्टा लटका दिया था।  जब हनुमान जी सीता माता को ढूंढ़ने लंका गए थे तो उनको जब रावण के सैनिकों ने बंदी बना कर उनकी पूछ को आग लगा थी तब उन्होंने लंका को काफी जला दिया था।  हुनमान जी ने रावण के कारागृह को भी जला दिया था जिससे सारे ग्रह मुक्त हो गए किन्तु शनिदेव उलटे लटके होने के कारण थोड़ा जल गए थे तब हुनमान जी ने उनको तेल लगाकर  पीड़ा  कम किया था।  तब से  आज तक शनिदेव को तेल चढ़ाने की प्रथा चलती आ रही है। जो भी इंसान शनिदेव की पूजा अर्चना करता है और उनको तेल चढ़ाता है उनकी हर मुसीबत दूर होती है और शनिदेव की कृपा उनपर हमेशा बरसती है।

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